करणी महिमा
प्रथम गजानन को नमन, वर दो देवा खास
मेहाई महिमा कथूं, घट में करो उजास
सदा सवारी सिंह की सदा नयन में नेह
चारण कुल आये सती ,बार बार घर देह
हम महिमा गाते करणामय किनियाण की
ये देशनोक है तपोभूमि करनल मात की
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उदित प्रभंजन धवल चार बिच
औरण वन बिकाण धरा पे
एक नगरी है विख्यात देशाणा नाम की
यही कर्मभूमि है नवलख लोवड़ियाल की
यह देशनोक है तपोभूमि करनल मात की
चारण वंश अति बडभागी सगती के सेवक अनुरागी
शिव आज्ञा ले धर पर आये सद कर्मों के शुभ फल पाये.
ज्यां घर जन्मी मेह दुलारी भयनाशी भव तारण हारी
लीला लाख दिखाई अंबे जयति जयति जय जय जगदम्बे
चहूं और जिसकी सकलाई भक्तों को रखती शरणाई
मां हरती घड़ियां दारुण दुख आघात की.
हम महिमा गाते......
संकट में हाजिर सदा काटे कष्ट तमाम*
देशनोक ज्यां को भवन,करनल ज्यों को नाम
शुभ दर्शन मां के सुखदाई सेवक के मां सदा सहाई
समद बीच जद शाह पुकारी धेन दुहत मा बांह पसारी
शेखा की विपदा हरण, रखन धर्म को मान
संवली बनकर शंकरी, झट पहुंची मुल्तान
काट दी बेड़ी विपदारी ... काट दी मां बड़ी शेखा री
हम तेरा गुणगान करेंगे हे शिव कि प्यारी
काट दी बेड़ी महतारी'
जो भी दर पर आ गया, कबहूँ ना खाली जाय
काज सिद्ध सबके करे, करणी नाम कहाय
'रिडमल राज दियो मेहाई, अणदे की मां लाव जुड़ाई
दया सिन्धु है करनल मैया, ममता की शीतल पुरवैया
मां तारणहारा तूं ही सकल जहान की
हम महिमा गाते.....
तूं शिव की आराधना, तू शंकर के प्राण*
अर्धनारीश्वर रूप में,पूजे सकल जहान
करनल गर्व कान्ह को गारयो
दे हाथल पापी नै मारयो
बीके की अर्जी चित लाई
निज कर गढ़ की नींव लगाई
कपिल मुनि के आश्रम , डूब गया जब लाल
सिंह सजा जमपुर गयी, करनल बीस भुजाल
बदल दी सृष्टि विधना री...बदल दी सृष्टि विधना री
शक्ति देख अचंभित रह गयी,ये दुनिया सारी
बदल दी सृष्टि विधना री.
देपावत कुल को मिली, खुशियों की सौगात
काबे कर निज लाडले,खती मढ़ में मात
किरपा भयी बन्ने पे भारी मूरत घड़ी मोहिनी प्यारी
पूर्ण कर सब काज मेहाई,, परम जौत में जौत समाई
सुर नर मुनि कर रहे जय जय करणी मात की
मैं मतिहीन कथूं के माया
ब्रह्मा तक तो वरण ना पाया
प्रांजल पर रखियो प्रभुताई
जन्म जन्म दे मां शरणाई
प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
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