ओल्यूं कर कर दिवस बिताऊं, कब मां मढ बुलवाये
दिव्य रूप अलौकिक मां का, जो देखे तिर जाये
पल पल बढती जाये मन में, दर्शन की अभिलाषा
एक बार दर्श कराओ अंबा, पूरो मन की आसा
विनती सुण जगदम्बे, दया कर भुजलंबे
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धर पर माना सात अजूबे, महल सुहाने प्यारे
लेकिन है सब ही तो फीके आगे भवन तिहारे
दुनिया भटके द्वारे द्वारे , मैं तो तुमको ध्याऊं
आया मां तेरे शरणे मैं नत हो शीश झुकाऊं
विनती सुण जगदम्बे, कृपा कर भुजलंबे
अगले जन्म मां देना हमको निज चरणों में डेरा
मढ़ में काबा कर मां पाऊं निश दिन दर्शन तेरा
निरख निरख मन मौद करे मां मूरत ये मतवाली
तूं ही आवड़ नागणेची मां कलकंते की काली
विनती सुण जगदम्बे, दया कर भुजलंबे
करणी तन मन करणी जीवन, करणी नाम सहारा
'करणी करणी रटते रटते, जीवन गुजरे सारा
अंबा हरना पीर जगत की, सुख संपत बगसाना
हाथ पकड़ प्रांजल को करणी, भव से पार लगाना
विनती सुण जगदम्बे कृपा कर भुजलंबे
प्रहलाद सिंह कविया प्रांजलTo Watch this full chirja on youtube click here
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