मेहाई थारी गजब रंगी रंगरेज
अम्बेजी थारी गजब रंगी रंगरेज
म्हानैं प्यारी लागै सा लाखीणी लोवड़ी म्हारो मनड़ो मोवै सा आ थारी लोवड़ी
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करणी मां थारै मुखड़ै चमक रियो तेज
जगदंबा थारै मुखड़ै चमक रियो तेज
पग सोवै कंचन री अनोखी पावड़ी
करणी मां थारी गजब रंगी ऱंगरेज
म्हानै प्यारी लागै सा मां थारी लोवड़ी
करणी मां थे तो धरती पे धरिया पांव
जगदंबा थे तो धरती पे धरिया पांव
चंदन सी महकी देशाणा री मही
बागां सी महकी देशाणा री मही
करणी मां थारी गजब रंगी रंगरेज
म्हानै प्यारी लागै सा मां थारी लोवड़ी
मेहाई थारी बोली सु बरसे फूल
बोलो तो लागे माँ फुला की सी झड़ी
मेहाई थारी
किनियाणी म्हारा मनड़ो तरसै सा
जगदंबा म्हारो मनड़ो तरसै सा
दर्शण री म्हारै है मां मन में घणी
करणी मां थारी गजब रंगी रंगरेज
म्हानै प्यारी लागै सा मां थारी लोवड़ी जगदंबा थानै प्रांजल याद करै
करणी मां थानै प्रांजल याद करै
करणी मां थानै देवराज अरज करै
सेवगां नै राखो मां लिपटाय लोवड़ी
मेहाई थारी गजब रंगी रंगरेज
म्हानै प्यारी लागै सा लाखीणी लोवड़ी
कवि प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल रचित इस चिरजा को यूट्यूब पर सुनने के लिए यहां टैप करें
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