दिवलो चांदी रो ,करणी माता रो प्यारो लागै सा
दिवलो चांदी रो
प्यारो लागै सा ज्योत नवखंड में जागै सा
दिवलो चांदी रो ....
1 तीन सौ किलो चांदी रो ,हीरा मोत्यां जड़ियो सा ...2
अन्नदाता रो दीप सवायो,भालो घड़ियों सा
दिवलो चांदी रो
2. खेलै मढ़ में रास करनला नवलख सगत्यां सागै सा
घूघरिया घमकातो भैरूं नाचैं आगै सा.....
दिवलो चांदी रो...
3 देशाणै में धाम मात रो,काबा री किलकारी सा
संगमरमर रो बण्यो देवरो,शोभा प्यारी सा
दिवलो चांदी रो .....
4. देशनोक आ पावन भूमि,केशर की सी क्यारी सा
जठै बिराजै मोटी मायड़,मेहदुलारी सा
दिवलो चांदी रो.....
5.....सुणज्यो मन री बात मावड़ी ,प्रांजल आज मनावै सा
अमृत हरासर मायड़ थारो दिवलो गावै सा
दिवलो चांदी रो
प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
भगवानपुरा
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