*तर्ज- मीठे रस से भरयोड़ी राधा रानी लागे*
*ओ करणी नाम सूं सफल जिंदगानी लागै*
*ओ म्हानैं प्यारी प्यारी देशाणा धीराणी लागै*
*बालपने सखियां संग खॆले, नवलख रास रचाई।*
*देवल मन ही मन हरसावे, सखियां मंगल गाई।*
*गावे गावे जी बधावा सुर ताल सा*
*तूं ही म्हारै मात पिता मां, तूं ही बहना भाई*
*तूं ही मालिक तूं ही दाता, धिन धिन मां मेहाई*
*म्हारो मनड़ो थारे चरणा माही लागे।।*
*आ दुनिया तो तो झूटी झूटी मैया म्हारी सांची*
*कलजुग में भगतां नैं तारै मैया बणकर मांझी*
*ओ म्हानैं मीठी मीठी मैया जी री वाणी लागै*
*जग हांसे तो उठकर आजे, तज आलस तन मांही।*
*पल में सब विपदा हर लीजे, म्हारी लाज बचाई।।*
*मां रा दर्श किया सोया भाग जागे।।*
*ध्यान धरै जगदीश तिहारो, आधै हेलै आई*
*प्रांजल नैं राखो जगदंबा आप सदा शरणाई*
*रहिज्यो टाबरियां रै मावड़ी थे सागै सागै*
प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
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