Saturday, 22 January 2022

खुड़द में चाल ए मनवा चिरजा लिरिक्स किन्नू बन्ना Khurad me chal e manva chirja lyrics kinnu banna kavi pranjal


 खुडद में चाल ए मनवा, जहां नवलाख रमती है .।

जहां नवलाख रमती है..... सगत साक्षात रमती है..... जहां रमती है

दरश इन्द्रेश के पाकर..... दरश इन्द्रेश के पाकर......

खुडद में चाल ए मनवा, जहां नवलाख रमती है .।


जहां नवलाख रमती है..... सगत साक्षात रमती है..... जहां रमती है

दरश इन्द्रेश के पाकर..... दरश इन्द्रेश के पाकर...... बात बिगड़ी भी बनती है

खुडद में चाल ओ मनवा.....


है हिंगलाजा जहां आवड़, संग करणी मां काबाली

संग करणी मां किनियानी

झुकालो शीश चरणों में, मात सिर हाथ धरती है


धरे मां भेष मर्दाना, सुहाना तन सजे बाना

सुहाना तन सजे बाना

दिशाएं दश तेरे मढ़ की, मां जय जयकार करती है


निरख कर मूरती मां की, मगन मन हो गया मेरा

मगन मन हो गया मेरा

है मुख पर चांद सी आभा, छवि हृदय उतरती है


करें किस बात की चिंता,शीश पर हाथ जब तेरा

है प्रांजल लाडला और लाडलों से मां की बनती है


खुड़द इंद्र बाईसा चिरजा

खुड़द में चाल रे मनवा

प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल



 

No comments:

Post a Comment