करणी माता आरती
श्री करुणामय किनियाण की ये आरती
दैत्य दलती सेवक को तारती
हे गुणागार , करुणावतार
तेरी निर्मल छवी निराली
कष्टों को मिटाने वाली
हे दुख हरनी मंगल करणी....२
मही व्योम उतारे आरती
दैत्य दलती सेवक को तारती
मचा त्राहीमाम , जब अमरधाम
देवों पर विपदा आई
दुर्गा बनकर तूं धाई
क्या खूब लड़ी , ले खंग खड़ी
असुरों के शीश उतारती
दैत्य दलती सेवक को तारती
हे ममता मयी,तेरी अमिट छवी
तूं मढ़ देशाण विराजे
कर शूल सुदर्शन साजे
हे भयभंजन हे जगरंजन
भगतो के काज सुधारती
दैत्य दलती सेवक को तारती
हे दया सिंधू, मां दीनबंधु
तेरी सकल जगत सकलाई
सन्मुख हो करती सहाई
जब भीर पड़े, मां सिंह चढ़े
विपदा से आन उबारती
दैत्य दलती सेवक को तारती
जब धर्म घटा ,और पाप बढ़ा
अवनी पर अंबा आई
हरने सबकी विपदाई
नत हो प्रांजल, रसना हर पल
तेरा ही नाम उचारती
दैत्य दलती सेवक को तारती
श्री करणामय किनियाण की ये आरती
दैत्य दलती सेवक को तारती
प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
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