*मां अद्भुत रूप तेरा, सबके मन भाये है*
त्रिदेव निरखने को, धरती पर आये हैं,
कानन कुंडल नथली, हेमल का हार सजे
भुजबंद कड़ा कर में, पायल झनकार बजे
त्रीशूल गदा धारे, सिर मुकुट सजाये है
त्रिदेव निरखने को धरती पर आये है
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आरूढ़ है अंब जिसपे, वह केहर गूंज करे
देखत नैनन ज्वाला, असुरन का जीव डरे
लाखों मारे पापी, कई भक्त बचाये हैं ९
त्रिदेव निरखने को धरती पर आये हैं
तेरा मढ़ संगमरमर का, सारे जग से न्यारा
मां कोटिक स्वर्गों से, तेरा देशनोक प्यारा
दर्शन की द्वार तेरे, हम आस लगाये हैं
त्रिदेव निरखने को धरती पर आये हैं
दो बीर खड़े द्वारे, मां चंडी के चेले
आंगन तेरे अंबे, लाखों काबा खेले
सबके हरने दुख मां, मढ़ जौत जलाये है?
त्रिदेव निरखने को धरती पर आये हैं
शरणागत सुत किन्नू, संग देवराज अरज करै
बिन दर्शन मात तेरे, प्रांजल के नैन झरै
रहो सदा सहाई मां तेरी महिमा गायें है
त्रिदेव निरखने को धरती पर आये हैं... »*
लेखक प्रांजल
स्वर किन्नू बन्ना (सुनंदन आढ़ा )
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