एक चाढाऊ चिरजा मां के चरणों में...
आ मदद चढण री टेम गयी कठै बाई... गयी कठै बाई
थारा टाबर कलपै आज... बिसर मत ज्याई
आ भारत भू पर वात विपद री छाई..... विपद री छाई
ओ थांनै क्यां में लागी देर..... मात मेहाई
आ मदद चढण री टेम.....
मां बंद कियां क्यूं द्वार देख विपदाई.... देख विपदाई
थारा कठै गया भुजबीस..... देवल की जाई
आ मदद चढण री टेम.....
मां कांयी सुखभर नींद सोयग्या माई..... सोयग्या माई
ओ कोरोना रो काल..... डसै जग मांही
आ मदद चढण री टेम.....
मां थे देवां का देव करो करुणाई......करो करूणाई
जग रो रो टेरै आज..... लेवो शरणाई
आ मदद चढण री टेम....
अब आणों पड़सी आज सगत सुरराई..... सगत सुरराई
प्रांजल री राखो बात..... कृपा कर आई
आ मदद चढण री टेम
प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
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