ओ म्हानैं प्यारो प्यारो लागैं खुड़द धाम
बुलाल्यो म्हानैं अन्नदाता
ओ मीठो मिश्री सो लागै थांरो नाम
मोत्यां सूं मूंगा अन्नदाता
ऊंचां चढ़ चढ़ डागलियै पर, म्है तो काग उडावां
कद मायड़ संदेशों भेजै, कद थांरै मढ़ आवां
कद मायड़ संदेशों भेजै, चोखा सुगन मनावां
ओ आवै दर्शण करियां, हिवड़ै में आराम
बुलाल्यो म्हानैं अन्नदाता
ओ म्हानैं प्यारो प्यारो लागैं खुड़द धाम
बुलाल्यो म्हानैं अन्नदाता
ओल्यूं कर कर दिवस बिताया, आषाढ़ आवियो प्यारो
उज्वल पक्ष में शुभ नवमी रो, जन्म दिवस मां थारों
ओ आवां दोड्या दोड्या, छोड र सारा काम
बुलाल्यो म्हानैं अन्नदाता
ओ म्हानैं प्यारो प्यारो लागैं खुड़द धाम
बुलावालो म्हानैं अन्नदाता
ओ मीठो मिश्री सो लागै थांरो नाम
मोत्यां सूं मूंगा अन्नदाता
सिर पर पेच कसूमल कूर्तो, मां नर भेष बणावै
रूप निहारण चांदलियो भी, उतर धरा पर आवै
ओ थारै मुखड़ै ऊपर, सूरज जिस्यो तेज
बुलाल्यो म्हानैं अन्नदाता
ओ म्हानैं प्यारो प्यारो लागैं खुड़द धाम
बुलावालो म्हानैं अन्नदाता
ओ मीठो मिश्री सो लागै खुड़द धाम
दिखलाद्यो म्हांनै अन्नदाता
और कोई आधार नहीं मां, एक आसरो थारो
गुण थांरा गातां प्रांजल रो, जीवन गुजरै सारो
ओ थारै चरणां में रमबा द्यो, दिन रात
बुलावाल्यो म्हानैं अन्नदाता
ओ म्हानैं प्यारो प्यारो लागैं खुड़द धाम
बुलाल्यो म्हानैं अन्नदाता
प्रहलाद कविया प्रांजल
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