हिंगलाज कहूं रिद्धुराज कहूं, कई रूप अनूप दिखाया माँ |2|
धरती पर पाप बढ्यो भारी, हरने मेहा घर आया माँ,
जय जय माँ, जय जय माँ ..... म्हारी माँ करणी माँ |2|
माथै पर मुकुट मणी धारी, मोतियन गलमाल सजाया माँ |2|
नवलाख लार लै रास रमो, घम घम घूघर घमकाया माँ,
जय जय माँ, जय जय माँ ..... म्हारी माँ करणी माँ |2|
जद नीच अधर्मी राड करी, तो पल में दुष्ट खपाया माँ |2|
पण शेख़ा री अरदास सुणी, तो संवली बण कर धाया माँ,
जय जय माँ, जय जय माँ ..... म्हारी माँ करणी माँ |2|
थे तीन लोक की स्वामिन हो, सारे जग पे हुकुम चलावो माँ |2|
फिर गौधन के हित औरण में, थे ग्वालिन भी बन ज्याओ माँ,
जय जय माँ, जय जय माँ ..... म्हारी माँ करणी माँ,
जय जय माँ, जय जय माँ ..... जय जय माँ, जय जय माँ /
प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
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